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बिना लाइसेंस चल रहा शिवाय हॉस्पिटल! उद्घाटन के बाद शुरू कर दी मरीजों की जांच और इलाज।

स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी! लाइसेंस से पहले ही अस्पताल में इलाज शुरू।

कोरबा। शहर के टीपी नगर क्षेत्र में 7 मार्च को विवादों के बीच श्रम मंत्री व अन्य जनप्रतिनिधियों द्वारा उद्घाटित शिवाय हॉस्पिटल एक बार फिर चर्चा में है। जानकारी के अनुसार अस्पताल प्रबंधन ने आवश्यक लाइसेंस प्राप्त किए बिना ही अस्पताल में मरीजों की जांच और इलाज की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

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बताया जा रहा है कि लगभग 100 बिस्तरों की क्षमता वाले इस अस्पताल के संचालन के लिए प्रबंधन द्वारा 2 मार्च 2026 को स्वास्थ्य विभाग में लाइसेंस के लिए आवेदन दिया गया है। हालांकि अभी तक लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, इसके बावजूद अस्पताल में ओपीडी शुरू कर दी गई है और मरीजों को डॉक्टर द्वारा परामर्श के साथ-साथ विभिन्न जांचें भी लिखी जा रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, अस्पताल का उद्घाटन करना एक अलग प्रक्रिया है, जिसके लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन मरीजों की जांच, उपचार, ओपीडी पंजीयन या अन्य चिकित्सकीय सेवाएं शुरू करने के लिए वैध लाइसेंस अनिवार्य होता है। नियमों के अनुसार लाइसेंस प्राप्त होने के बाद ही अस्पताल में ओपीडी, आईपीडी और अन्य जांच सेवाएं संचालित की जा सकती हैं।
जानकारी यह भी सामने आई है कि अस्पताल प्रबंधन ने 5 मार्च को पूजा-अर्चना के बाद ही ओपीडी शुरू कर दी, जबकि दो दिन बाद 7 मार्च को मंत्री के हाथों औपचारिक उद्घाटन कराया गया। इस दौरान मरीजों से 400 रुपये ओपीडी शुल्क लिया जा रहा है और कई मरीजों को ECG जांच भी लिखी जा रही है, जिसका शुल्क अस्पताल में 500 रुपये बताया जा रहा है। वहीं मरीजों का कहना है कि बाहर यही जांच लगभग 300 रुपये में हो जाती है।
उधर स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, लाइसेंस जारी करने से पहले विभागीय टीम द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया जाना आवश्यक होता है। निरीक्षण के दौरान अस्पताल की सुविधाएं, उपकरण, डॉक्टरों की उपलब्धता और अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जाती है। इसके बाद रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाती है, जिसके बाद ही संचालन की अनुमति दी जाती है। पूरी प्रक्रिया में सामान्यतः करीब एक महीने का समय लग सकता है।
इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि जब लाइसेंस की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, तब अस्पताल में मरीजों की जांच और इलाज कैसे शुरू कर दिया गया। अब देखने वाली बात होगी कि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं या फिर नियमों के उल्लंघन के बावजूद अस्पताल का संचालन इसी तरह जारी रहता है।

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