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मरीजों की हर सांस पर संकट… आखिर जिम्मेदार कौन?

वर्षों से जर्जर एप्रोच रोड पर डिलीवरी मरीजों से लेकर गंभीर रोगी तक हिचकोले खाने को मजबूर, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर उठ रहे सवाल।

मॉर्निंग माइंड कोरबा – शहर के पॉश इलाके कोसाबाड़ी चौक के समीप स्थित जिले के दो बड़े निजी अस्पताल—कृष्णा हॉस्पिटल और न्यू कोरबा हॉस्पिटल (एनकेएच)—तक पहुंचने वाली एप्रोच सड़क वर्षों से बदहाल स्थिति में है। करोड़ों रुपये के इन अस्पतालों तक जाने वाला यह मार्ग किसी ग्रामीण कच्ची सड़क से भी अधिक खराब हो चुका है। गड्ढों और उबड़-खाबड़ रास्ते के कारण मरीजों, परिजनों और आम नागरिकों को हर दिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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इसी मार्ग से फिजिक्सवाला, बाइक शो-रूम, मंगलम विहार कॉलोनी सहित कई प्रतिष्ठित संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का आवागमन भी होता है, लेकिन वर्षों बाद भी सड़क निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। सड़क पर केवल मलबा डालकर अस्थायी मरम्मत की जाती रही, जिससे हालात और खराब हो गए।
सबसे अधिक परेशानी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को उठानी पड़ रही है। गंभीर मरीजों को एंबुलेंस में ले जाते समय हर गड्ढे पर झटके लगते हैं। डिलीवरी के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं के परिजनों में यह डर बना रहता है कि कहीं रास्ते में ही प्रसव की नौबत न आ जाए। वहीं बुजुर्ग, अस्थि रोगी और दुर्घटना में घायल मरीजों के लिए यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं है।
हैरानी की बात यह है कि नगर निगम सीमा क्षेत्र में आने वाले इस महत्वपूर्ण मार्ग की बदहाली से प्रशासन, नगर निगम, जनप्रतिनिधि और संबंधित विभाग पूरी तरह वाकिफ हैं। राज्य में सरकारें बदलीं, जिले में अधिकारी बदले, लेकिन सड़क की तस्वीर नहीं बदली। वर्षों से लोग यही सवाल पूछ रहे हैं कि करोड़ों के अस्पतालों तक जाने वाली इस सड़क का निर्माण आखिर करेगा कौन?
इसी मार्ग के किनारे विकसित मंगलम विहार कॉलोनी और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के संचालन के लिए भी बेहतर सड़क आवश्यक है। ऐसे में यह सवाल भी उठ रहा है कि संबंधित संस्थानों और कॉलोनी डेवलपर द्वारा स्वीकृति की शर्तों का पालन किया गया या नहीं? यदि किया गया तो आज तक सड़क निर्माण क्यों नहीं हो सका और इसकी जिम्मेदारी किसकी है?
स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों पहले एक गंभीर घटना के बाद एनकेएच के डायरेक्टर डॉ. एस. चांदनी ने अपने स्तर पर सड़क को समतल कराने की पहल की थी, लेकिन उसके बाद न प्रशासन ने कोई स्थायी समाधान निकाला और न ही किसी जनप्रतिनिधि ने इस दिशा में गंभीर पहल की।
आज भी हर दिन सैकड़ों लोग इसी जर्जर मार्ग से गुजरने को मजबूर हैं। ऐसे में लोगों की मांग है कि मरीजों की सुरक्षा और आमजन की सुविधा को देखते हुए इस एप्रोच रोड का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि अस्पताल तक पहुंचने का रास्ता राहत का माध्यम बने, परेशानी का नहीं।

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